मौजूदा समय में बाजार में कई खबरों से घिरा हुआ है। एक ओर जहां राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों में असमंजसता बरकरार है। वहीं दूसरी ओर 18 जून को ब्याज दरों में कटौती की आस में बाजार मुंह ताके खड़ा है। वैश्विक स्तर भी बाजार के लिए कई चुनौतियां हैं। जिसमें 17 जून को ग्रीस में होने वाले चुनाव के नतीजे और स्पेन की खस्ताहाली प्रमुख चिंता का विषय है।
मोतीलाल ओसवाल एएमसी के नितिन राकेश का कहना है कि बाजार की मौजूदा परिस्थति को देखते हुए निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करना शुरू कर दिया है। मौजूदा समय में आर्थिक सुधार जैसे मामले सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं, वहीं राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवारों को लेकर मची अफरातफरी बाजार के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। हालांकि इसका असर छोटी अवधि के लिए ही रहेगा। लंबी अवधि में बाजार का रुख ब्याज दरों में कटौती और कंपनियों के तिमाही नतीजे ही तय करेंगे।
नितिन राकेश के अनुसार उम्मीद है कि 18 जून को मौद्रिक नीति के ऐलान के दौरान आरबीआई रेपो रेट में 0.25 फीसदी और सीआरआर में 0.5-1 फीसदी की कटौती कर सकता है। वहीं ब्याज दरों में कटौती होती है तो बाजार में अच्छी तेजी देखी जा सकती है। हालांकि इसमें वैश्विक संकेतों की भी अहम भूमिका होगी। प्रमुख दरों में कटौती के बाद बाजार बढ़ते हैं तो कंज्युमर्स ड्यूरेबल, बैंकिग और ऑटो शेयर सबसे ज्यादा तेजी दिखाएंगे। लेकिन बाजार फिलहाल 4,800-5,200 के दायरे में रहेगा।
डेल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के एमडी यू आर भट्ट के अनुसार मौजूदा स्तरों से बाजार में ज्यादा बढ़त की उम्मीद नहीं है। वहीं फिलहाल यूरोपीय संकट बरकरार रहने की आशंका है, जिससे बाजारों पर दबाव बना रहेगा। हालांकि आगामी सोमवार को रिजर्व बैंक प्रमुख दरों में कटौती करता है तो बाजार के लिए बेहतर होगा। ऐसे में निफ्टी ऊपर की ओर 5,600 तक के स्तर दिखा सकता है।
यू आर भट्ट के अनुसार 18 जून के आरबीआई की पॉलिसी में बाजार के हाथ निराशा लगती है तो निफ्टी नीचे की ओर 4,800 तक के स्तर दिखा सकता है। हालांकि इस स्तर पर निफ्टी को अहम सपोर्ट है।
